अलग हर सिम्त से दिखता है मन्ज़र,
नज़रिया है ग़लत क्या और सही क्या.

सोमवार, 21 जून 2010

लोग

संगीत सभा में,
सम से दो मात्रा पहले,
ताली देने वाले लोग.

उन्यासी या इक्यासी,
अंगेज़ी में बताओ,
कहने वाले लोग.

अपनी धुन छोड़,
पराई धुन पर,
थिरकने वाले लोग.

मंदिर की क़तारें तोड़कर,
दर्शन पा कर,
धन्य होने वाले लोग.

रात के अंधेरे में,
तरह तरह से,
लूट लेने वाले लोग.

तिफ़्ल को कूड़ेदानों,
पर बेफ़िक्र होकर,
फ़ेंक जाने वाले लोग.

महापंचयतों में,
विभिन्न मुद्राओं में,
मुद्रा लहराने वाले लोग.

घर की ख़बरें,
साहूकार के पास,
देकर पाने वाले लोग.

एक ख़बर को,
बहुत बेख़बरी से,
दबा देने वाले लोग.


मेरे और आप से,
दुनिया में रहने वाले,
दुनिया के वाले लोग.

हर्षवर्धन.

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