अलग हर सिम्त से दिखता है मन्ज़र,
नज़रिया है ग़लत क्या और सही क्या.

रविवार, 28 नवंबर 2010

और है.

दिल की फ़र्माइश है सर आँखों मगर,
एक पूरी हो तो फ़िर इक और है.

ख़त्म सुनता था हुए राजा नवाब,
पर हक़ीक़ी वाक़या कुछ और है.

आदमी अब क्या करे शर्मो लिहाज,
जिस भी सूरत जीतने का दौर है.

तुम भले इन्कार कर लो आग से,
कह रहा उठता धुवाँ कुछ और है.

बेअसर है झिंगुरों का सा रियाज़,
सुर को साधे जो गला कुछ और है.

खुश वो,जो बिक जाए ऊँचे दाम में,
आज तो बाज़ार ही सिरमौर है.

15 टिप्‍पणियां:

  1. वाकई ये कविता कुछ और ही है...
    बहुत सुन्दर...

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  2. ख़त्म सुनता था हुए राजा नवाब,
    पर हक़ीक़ी वाक़या कुछ और है.

    तुम भले इन्कार कर लो आग से,
    कह रहा उठता धुवाँ कुछ और है

    बहुत खूबसूरत शेर कहे हैं ....अच्छी गज़ल

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  3. sangeeta ji, aapki prashanshaa maayane rakhtee hai.prernaa hetu dhanyawaad.

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  4. सोचा की बेहतरीन पंक्तियाँ चुन के तारीफ करून ... मगर पूरी नज़्म ही शानदार है ...आपने लफ्ज़ दिए है अपने एहसास को ... दिल छु लेने वाली रचना ...

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  5. बहुत खूबसूरत ब्लॉग मिल गया, ढूँढने निकले थे। अब तो आते जाते रहेंगे।

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  6. दिल की फ़र्माइश है सर आँखों मगर,
    एक पूरी हो तो फ़िर इक और है.

    तुम भले इन्कार कर लो आग से,
    कह रहा उठता धुवाँ कुछ और है.

    hmm
    ye sher to bahut ache hain....
    bas jhinguron ke liye dukh ho rhaa he...bechaare kyaa kren...shouk bhi koi cheez he aakhir.:P...:P...jst kidin
    vaise un_kavi se...jaane aapna kya matlab he.....magr French me..UN ...ek (Masculine)...ke liye use hota he...that means..EK KAVI...:)

    take care

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  7. hindi mein un kaa matlab negative hai....un matlab .kavita liukhane waalaa ek aisaa bandaa jo kavi nahee manaa jaataa.

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