अलग हर सिम्त से दिखता है मन्ज़र,
नज़रिया है ग़लत क्या और सही क्या.

शुक्रवार, 20 अगस्त 2010

बखतक दगिड़ हिटौ.?

पछिनैं छूट जाला,बखतक दगिड़ हिटौ,
नान्तरी पछताला,बखतक दगिड़ हिटौ.

बखतैकि सारी माया,बखतैकि धूप छाया,
बखतक हँसी आँसू,बखतक दगिड़ हिटौ.

बखतैली घाव करौ,बखतैली घाव भरौ,
बखतैकीं कैल जितौ,बखतक दगिड़ हिटौ.

बखतैल राज बणाईं,बखतैल रंक करौ,
बखतैल राज करौ,बखतक दगिड़ हिटौ.

बखतैल भगत देखौ,भगतैल बखत देखौ,
अफ़ुँ लै बखत देखौ,बखतक दगिड़ हिटौ.

बखतैल न्योल गाई,बखतैल झ्वाड़ लगाईं,
बखत ’कमीना’ गानौ,बखतक दगिड़ हिटौ.

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